दोस्ती जीवन में मित्रों यारो दोस्तों का अपना अलग ही महत्व हैं. इनके बिना जीवन बेरंग सा प्रतीत होता हैं. हम जीवन में कई लोगों से मिलते हैं कई दोस्त बनाते है मगर कुछ दोस्त खास होते हैं और उनके जाने के बाद जीवन में एक शून्य बन जाता है और वो कभी भर नहीं पता ।
मेरा बेस्ट फ्रेंड राजीव, हमारे बीच कई सारी समानताएं थी जिसके कारण वह मुझे बेहद प्रिय था । हम दोनों एक ही स्कूल की एक ही क्लास में पढ़ते थे इस कारण हमारा आना जाना भी साथ होता हैं. मुझे स्कूल के डेली होम वर्क हो या जिंदगी के किसी भी मोड़ पर कोई भी परेशानी हो, हमेशा साथ रहता और मेरी भी सोच उसके प्रति ऐसी ही थी ।
लगभग 15 वर्ष पूर्व मेरे एक अच्छे मित्र की मृत्यु कैंसर से हो गई, वह 45 वर्ष का था । हालाँकि हम अक्सर नहीं मिलते थे, मैं इंडिया के एक तरफ रहता था और वह दूसरी तरफ, लेकिन हम निरन्तर सम्पर्क में रहते, हम खूब हंसते थे और घंटों बातें करते थे । साथ में भविष्य की प्लानिंग करते थे ।
उनका एक प्यारा परिवार था, वो बैंक में ऑफिसर था, वो हर तरह से एक खुश, सफल व्यक्ति था । हम सभी जानते थे कि वह मरने वाला है, डॉक्टर जवाब दे दिया था और ये बात उसे भी मालूम थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उसकी आँखों में कोई उदासी नहीं थी और हममें से कोई भी उसके आस-पास रहने या यहाँ तक कि अपरिहार्य के बारे में बात करने में असहज महसूस नहीं करता था।
उसके बारे में यह अजीब शांति थी । कोई हड़बड़ी नहीं, कोई कड़वाहट नहीं । जब मैंने उससे पूछा कि वह जीवन और मृत्यु के बारे में कैसा महसूस करता है, तो उसने यही कहा:
"जब मैं एक बच्चा था तो हमारे पड़ोस के रमणा अंकल के घर में दो कुत्ते हुआ करते थे, दोनों आँगन में बंधे रहते थे, उनमें से एक कुत्ता दिन भर इधर-उधर पड़ा रहता था, जो टाइम से जो दो खा लेता फिर कहीं एक किनारे जा कर लेट जाता, दिन भर लेटे रहता था या पूरे दिन सोते रहता था। अगर कोई उसे उठाता तो वह बिना किसी परेशानी के उन्हें अपनी आंखों के कोने से देखता और फिर वापस वही चला जाता जो वह पहले कर रहा था, कुछ भी नहीं ।
दूसरे की एक अलग कहानी थी । यह ऊर्जा से भरा था या शायद गुस्से से भी । हमेशा अपनी जंजीर को चीरते हुए, हमेशा बंधे रहने के खिलाफ लड़ते रहता; मुक्त होना चाहता था, एक तरह से या किसी अन्य। हर मौके पर सभी पर भौंकना, ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करना ।
मैं उन दो कुत्तों और उनके बहुत से निपटने के लिए चुने गए दो अलग-अलग तरीकों को कभी नहीं भूलूंगा । एक, परिस्थितयों के आगे समर्पण कर दिया और दूसरा हर संभव तरीके से संघर्ष कर इसे बदलने की कोशिश करता था हालांकि दुर्भाग्य से, काफी व्यर्थ था ।
मैं लोगों के साथ ऐसा ही देखता हूं । एक, जिसने जीवन को 'हाँ 'कहा है और दूसरा जिसने 'ना' कहा है । मैंने तब निर्णय लिया था कि मैं जीवन को हाँ कहूंगा, इसे पूरी तरह से जीऊंगा, हर अवसर का सर्वोत्तम लाभ उठाऊंगा। जीवन में जिस किसी को मेरी जरूरी होगी हमेशा खड़ा रहूंगा। हर दिन ऐसे जियूँगा जैसे कि यह मेरा आखिरी दिन हो, यह सुनिश्चित करते हुए कि मुझे कुछ न करने या हमारे इस जीवन में अपना सर्वश्रेष्ठ समय नहीं बनाने या किसी भी अधूरे काम को पीछे छोड़ने का पछतावा नहीं होगा। ”
हम पूरी रात ऐसे ही बातें करते रहे, जैसे पहले कई बार करते थे । वह दिन मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था । मेरा दोस्त उस दिन मेरे लिए और बन गया। वह मेरा गुरु और आदर्श बना । मैंने उसके उदाहरणों का पालन करने की कोशिश की है, जो मुझे दिया गया है उसका सबसे अच्छा उपयोग कर रहा हूं और हर दिन जी रहा हूं, मुझसे जो बन पड़े लोगों की मदद करता हूँ क्योंकि यह मेरा आखिरी दिन है, यही सोच कर जिंदगी की डगर में आगे बढ़ रहा हूँ ।


Very correct
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