शुक्रवार, 15 अप्रैल 2022
स्पष्टवादी
हम अक्सर देखते हैं कि अपने परिवार, दोस्त या समाज में कई तरह के लोग मिलते हैं, उनकी सोच, उनकी मानसिकता अलग अलग होती है। मुझे इन सब में जो बात दिल तक पहुंचती है वो है सच्चाई, ईमानदारी, सादगी और मुख्य रूप से स्पष्टवादी ।
स्पष्टवादी या स्पष्टवक्ता वो होता है जो बिना किसी भय या संकोच के बोलने वाला या कहने वाला व्यक्ति, स्पष्ट या खरी बात कहने वाला, वो जो साफ साफ बातें कहता हो।
खरा आदमी किसी से चिकनी चुपड़ी बातें नहीं करता। खरा व्यक्ति जो सामने वाले में देखता है या महसूस करता है वह सामने वाले के मुंह पर बोल देता है भले ही अगला इससे बुरा मान जाए या रूठ जाए। ऐसे स्पष्टवादी लोगों को समाज में एक और नाम दिया है "मुंहफट"
स्पष्टवादी व् मुंहफठ में गौर करने पर एक स्पष्ट रेखा खींची होती है, स्पष्टवादी का कभी भी सामने वाले को उसकी वास्तविकता से अवगत कराता है भले ही उसकी बातें सामने वाले को नापसन्द हो या कड़वी लगे।
मुंहफठ की हमेशा कोशिश होती है कि सामने वाले को उसकी कमजोरी को या किसी भी तरह से ताना मारकर आहत करना उद्देश्य होता है। ऐसे लोगों से दूर रहना ही बेहतर होगा
ईमानदार होने का मतलब ही है स्पष्टवादी होना। ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
एक सच्चा और ईमानदार इन्सान स्पष्टवादी होता हैं. उसका व्यवहार दिखावे की बजाय स्वप्रेरित होता हैं. उनके व्यवहार में इनके ये गुण स्पष्ट देखे जा सकते हैं. यदि एक व्यक्ति ईमानदारी और सच्चाई की राह पर चलता हैं तो देर से ही सही समाज में हर कोई उसका सम्मान करेगा तथा वक्त पड़ने पर वे उनके साथ खड़े नजर आएगे.
वहीँ दूसरी तरफ स्वार्थी, झूठे और चोर प्रवृत्ति के व्यक्ति कभी किसी का भला नहीं चाहते हैं वे हमेशा औरों को पीड़ित ही देखना चाहते हैं. इस तरफ के लोगों के साथ समाज भी वैसा ही व्यवहार व सोच रखता हैं जैसी वे स्वयं रखते हैं।
व्यवहार कुशलता भी एक कला है कि कब किस मुद्दे पर कितना बोलना है और उसका सामने वाले पर और कभी कभी स्वयं पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है और यहीं पर आपके बोल को स्पष्टवादी व् मुंहफठ के तराजू में मापने का काम होता है। कहते हैं न इंसान को बोलना सीखने में दो साल लगते हैं तो उसे क्या बोलना है ये सीखने में जिंदगी निकल जाती है।
संक्षेप में मुंहफठ मतलब - असभ्य होना, अपने मद में चूर होकर छोटे बड़े का ध्यान न रखना, हमेशा दूसरे को अपमानित करने की कुचेष्ठा रखना, दुसरो की भावनाओं की कद्र न करना, कभी कभी जानबूझ कर सामने वाले को छोटा दिखाने की कोशिश करना, इस तरह की सोच वाले के अंदर अहम् भी कूट कूट कर भरा रहता है। ऐसे लोग दोस्त हो या रिश्तेदार इनको दूर रखिये ये कभी आपके नहीं हो सकते। शायद इन्हीं लोगों के लिए गीतकार इन्दीवर ने फ़िल्म उपकार में एक बेहतरीन गाना लिखा है जो आज के रिश्तों को आइना दिखाती है
" कसमें वादे प्यार वफा सब
बातें हैं बातों का क्या
कोई किसी का नहीं ये झूठे
नाते हैं नातों का क्या
सुख में तेरे साथ चलेंगे
दुख में सब मुख मोड़ेंगे
दुनिया वाले….
दुनिया वाले तेरे बनकर
तेरा ही दिल तोड़ेंगे
देते हैं….
देते हैं भगवान को धोखा
इन्सां को क्या छोड़ेंगे
आज एक सच्चे स्पष्टवादी दोस्त हो या रिश्तेदार, उसके विचारों को ईमानदारी से स्वीकार कीजिये और जहां जरूरत हो, और जहां गुंजाईश हो अपने आप को सुधारिये। पर जब कभी लगे कोई दोस्त या रिश्तेदार आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचा कर अपने आप को श्रेष्ठ साबित की कोशिश कर रहा है, उसी वक्त स्पष्टता के साथ अगले को अपनी वाजिब प्रतिक्रिया देना भी जरुरी है भले ही उस दोस्ती या रिश्तों में दूरी आ जाए। किसी से कोई उम्मीद मत रखिये अपने आप को परिस्थितियों के अनुकूल ढालिये।
किसी ने क्या खूब कहा है
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
अच्छाई
हमारे दैनिक जीवन में बहुधा सुनने में आता है कि फलां व्यक्ति बुरा है या फलां व्यक्ति अच्छा है। बुरे की बात तो समझ में आती है पर अच्छा कौन होत...



Nice story
जवाब देंहटाएं